विधि
- ठंडे चावल को गीली उँगलियों से तोड़ लें — हर दाना अलग होना चाहिए। अगर हिलाने पर गुठली रह गई तो चावल भापकर चिपक जाएगा, भुनेगा नहीं।
- वोक को सबसे तेज़ आँच पर तब तक गरम करें जब तक हल्का धुआँ न उठे। 1 बड़ा चम्मच तेल डालें और फेंटा अंडा डालें। दस सेकंड तक ढीले से चलाएँ — दहीदार बस मुलायम-से जमने चाहिए। निकाल लें।
- एक और बड़ा चम्मच तेल डालें। झींगा को 30 सेकंड तक भूनें जब तक वे मुड़ न जाएँ, फिर हैम और चा शाओ को 30 सेकंड और। अंडे के साथ निकाल लें।
- आख़िरी बड़ा चम्मच तेल डालें, फिर चावल। उन्हें वोक की दीवार पर दबाएँ और दस सेकंड बैठने दें फिर पलटें। दो मिनट तक दोहराएँ — लक्ष्य 'वोक हेइ' है, वह दुर्लभ धुएँदार जलन-निशान।
- अंडा, झींगा, हैम और चा शाओ वापस डालें। मटर, हरी प्याज़ का सफ़ेद भाग और अदरक डालें। ज़ोर से उछालें। सोया सॉस, नमक और सफ़ेद मिर्च से सीज़न करें।
- 30 सेकंड का अंतिम पलट-उछाल — हर दाना तेल से हल्के-से चमकना चाहिए और अलग दिखना चाहिए। आँच से उतारकर हरी प्याज़ का हरा भाग और तिल का तेल डालें। थाली में निकालें। तुरंत खाएँ।
सांस्कृतिक संदर्भ
यांगज़ौ जिआंगसू की एक नहरी नगरी है जो अपनी रसोइयों के लिए मशहूर है — कथित तौर पर यह व्यंजन सातवीं शताब्दी में सुई वंश के सम्राट यांगदी के लिए उनकी नहरी यात्रा के दौरान बनाया गया था। यांगज़ौ रसोइयों का मानक: हर दाना अलग और दिखाई देता हो, कोई चिकना धब्बा न हो, चा शाओ और झींगा बराबर बँटे हों ताकि हर चम्मच में सब कुछ बराबर मिले। रंगों का प्रोफ़ाइल — पीला चावल, लाल चा शाओ, गुलाबी झींगा, हरी मटर और प्याज़ — दृश्य पहचान है।